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Monday, September 14, 2015

केन्द्रीय हिन्दी संस्थान आगरा के निदेशक डॉ नंदकिशोर पांडे


जयपुर हिन्दी को संरक्षण देने के साथ ही आधुनिक भाषा के रूप में विकसित करने की जरूरत है। हिन्दी को भारतीय संस्कृति और गौरव के रूप में जन-जन से जोडऩे की जरूरत है। यह कहना है शिक्षा राज्य मंत्री
प्रोफेसर वासुदेव देवनानी का।
देवनानी सोमवार को हिन्दी दिवस के अवसर पर भाषा एवं पुस्तकाल विभाग द्वारा जवाहर कला केन्द्र में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।

 देवनानी ने कहा कि चिकित्सा, विज्ञान एवं तकनीकी विषयों में अधिकाधिक हिन्दी भाषा में लेखन को बढावा देने की जरूरत है। शिक्षामंत्री ने कहा कि पचास से अधिक देशों के पांच सौ से अधिक केंद्रों पर हिंदी पढाई जाती है।
जिस भाषा ने दूसरी भाषाओं को अपनाते हुए उनका संरक्षण किया है, एेसी भाषा के विकास की जरूरत है। समारोह में माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की वर्ष 2015 की परीक्षामें हिन्दी में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र देकर शिक्षामंत्री ने सम्मानित किया।

हिन्दी को मिले वैश्विक दर्जा
एक समय था जब हिंदी क प्यूटर की भाषा नहीं थी परन्तु आज इन्टरनेट में भी हिन्दी का बोलबाला है। बहुराष्ट्रीय क पनियां भी अपने उत्पाद भारत में बेचने के लिए हिन्दी में ही अपना प्रचार कर रही हैं। हिन्दी के विश्वव्यापी महत्व को समझते हुए इसे विश्व की पहले दर्जे की भाषा के रूप में स्थापित किया जाना चाहिए।
सरकारी कामकाजों में पिछड़ापन
केन्द्रीय हिन्दी संस्थान आगरा के निदेशक डॉ नंदकिशोर पांडे ने कहा कि हिन्दी भाषा बोल चाल में नहीं बल्कि सरकारी कामकाजों में पिछड़ी हुई है। हिन्दी की ताकत यही है कि वह सबकी है, लेकिन बोली के रूप में किसी की नहीं है। इस अवसर पर देवर्षि कलानाथ शास्त्री ने हिन्दी के गौरव को सदा अपने साथ रखने और भाषा शुद्धि पर भी विशेष ध्यानल देने पर जोर दिया। भाषा एवं पुस्तकालय विभाग की निदेशक चित्रा गुप्ता ने भी विचार व्यक्त किए

स्रोत -
http://rajasthanpatrika.patrika.com/story/rajasthan/hindi-need-to-develop-as-a-modern-language-1302301.html

ये विदेशी बालाएँ गर्व से हिंदी बोलती हैं


#भोपाल #मध्य प्रदेश आज अखबारों से लेकर सोशल मीडिया में हिंदी दिवस छाया हुआ है. गत दिनों मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में हुए विश्व हिंदी सम्मेलन में भी विदेशी लोगों का हिंदी प्रेम जगजाहिर हो चुका है. जिसमें हिंदी भाषा सीखने वालीं विदेशी युवतियां स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहीं थीं.


जहां कजाकिस्तान से आईं हिंदी प्रेमी छात्रा आलिया न्यूज18 से रूबरू हुईं. आलिया को बॉलीवुड का हिंदी गीत-संगीत यहां तक खींच लाया. बॉलीवुड फिल्मों की प्रशंसक आलिया दिल्ली में रहकर हिंदी भाषा को दुरूस्त कर रहीं हैं.
हिंदी भाषा प्रेमी आलिया बॉलीवुड एक्टर सिद्धार्थ मल्होत्रा से शादी करने की इच्छुक हैं. आलिया अब हिंदी सीखकर अपने देश नहीं लौटना चाहतीं. आलिया का कहना है कि, 'अगर हिंदी भाषियों के साथ मुझे रहने का और घर बसाने का मौका मिले तो बेशक यही रहूंगी.' रूस के सेंट पीट्बर्ग के रहने वालीं कैमिला भी हिंदी सम्मेलन में शरीक हुईं हैं.

रूसी कमिला हिंदी सीखकर अनुवादक बनना चाहती हैं. पिछले दो हफ्ते से हिंदी सीख रहीं कमिला करीब दो साल भारत में गुजारेंगी. दिल्ली में हिंदी सीख रहीं कमिला भारत में हिंदी के बड़े-छोटे कार्यक्रम में शामिल होती रहती हैं.
ये विदेशी बालाएं गर्व से कहती हैं #हिन्दी_में_बोलो






दिल्ली के केंद्रीय हिंदी संस्थान में हिंदी भाषा सीख रहीं जॉय पार्क का कहना है कि, 'मेरे पति भारत में बिजनेस करना चाहते हैं, इसलिए मैं हिंदी सीखना चाहती हूं. जॉय के मुताबिक, भारत को समझने के लिए हिंदी सीखना बहुत जरूरी है. जॉय ने बताया कि उनके बिजनेसमेन पति भारत में टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में बड़ा काम शुरू करना चाहते हैं. चूंकि वे अपने काम में बिजी रहते हैं इसलिए वे हिंदी सीखकर उनके साथ हाथ बटाना चाहती हैं.

जॉय के साथ ही हिंदी सम्मेलन में आईं सुश्री सुई बेक भी दिल्ली में हिंदी सीख रहीं हैं. सुई ने बताया कि वे भारत में रहकर एनजीओ के साथ काम करना चाहती हैं. इस काम में गांव-गरीबों के बीच जाना पड़ता है. चूंकि भारत में जनसामान्य की भाषा हिंदी है. यही कारण है कि वे यहां रहकर हिंदी भाषा का ज्ञान ले रहीं हैं.

कोई भारत में बिजनेस करने के लिए हिंदी भाषा सीख रहा है, तो कोई यहां के बॉलीवुड में हाथ आजमाने के लिए. वहीं जपान से आईं 26 वर्षीय सुश्री युकाको भारतीय इतिहास में बेहद रुचि रखती हैं. वे भारत में ही रच बस जाना चाहती हैं. हिंदी भाषा में मास्टर डिग्री लेने के बाद वे जापान जाकर हिंदी के क्षेत्र में काम करना चाहेगी.

जर्मनी की तत्याना ओरास्कया हम्बुर्ग विश्विद्यालय शिक्षित हैं. वे इन दिनों रूस के सेन्ट पीट्बर्ग में 'आधुनिक विज्ञान और भारत' विषय को हिंदी में पढ़ाती हैं. 16 सालों से कॉलेज में हिंदी पढ़ाने वाली प्रोफेसर तत्याना का विचार है कि मुख्यत: वे ही विदेशी हिंदी सीखना चाहते हैं जिन्हें भारत की संस्कृति से बहुत अधिक लगाव है या फिर उनको यहां व्यापार करने में रुचि है.

भारत के ही मणिपुर राज्य में नागा हिंदी विद्यापीठ संचालित करने वाली सुश्री अहम कामेयी सालों से सैंकडों छात्रों को हिंदी सिखा चुकी हैं. यह संस्थान उनके पिता एसके कामेयी ने 1973 में मणिपुर भाषा के अलावा हिंदी सीखने वालों के शुरू किया था.

फिजी के नंड्रोंगा आर्या कॉलेज में हिंदी विभाग की विभागाध्यक्ष साधना शर्मा और प्राध्यापक रोहिणी कुमार 10 सालों से हिंदी के क्षेत्र में कार्य कर रही हैं. पिछले दस सालों में वे हजारों छात्र-छात्राओं को हिंदी भाषी बना चुकी हैं. दोनों वहां की मातृ भाषा 'वोसा वाकावीवी' के अलावा हिंदी और अंग्रेजी माध्यम में बच्चों को शिक्षित करती हैं. बता दें कि फिजी में 9-10वीं कक्षा तक हिंदी पढ़ाया जाना अनिवार्य है.

स्रोत -
http://hindi.news18.com/news/madhya-pradesh/hindi-language-lover-foreign-girls-735188.html

Friday, September 11, 2015

तजाकिस्तान की मदीना को हिंदी प्रेम लाया भारत

भोपाल| इन दिनों मदीना को बोलते सुन उनके आसपास मौजूद भारतीय लोग हैरान हैं। तजाकिस्तान की रहने वाली मदीना फर्राटेदार हिंदी बोलती हैं। उनके मुंह से निकले हिंदी के शब्द उनके हिंदी भाषी होने का अहसास कराते हैं। उनके दिल में हिंदी ही नहीं, बल्कि हिंदुस्तान के प्रति भी विशेष प्रेम है।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में चल रहे तीन दिवसीय 10वें विश्व हिंदी सम्मेलन में हिस्सा लेने आईं तजाकिस्तान की यह युवा हिंदी प्रेमी बहुत उत्साहित हैं। वह हिंदी को अपना करियर बनाना चाहती हैं।
उन्होंने आईएएनएस से चर्चा के दौरान कहा कि जब पहली बार हिंदी सुनी, तो यह उनके दिल को छू गई। उन्होंने तजाकिस्तान में रहते हुए ही हिंदी सीखी, लेकिन इसमें दक्षता चाहती थीं, इसलिए हिंदुस्तान चली आईं।
मदीना ने दिल्ली के केंद्रीय हिंदी संस्थान में नौ माह का पाठ्यक्रम पूरा किया। वह अब आगरा के हिंदी संस्थान में अध्ययनरत हैं। वह हिंदी की अनुवादक बनना चाहती हैं। इसके लिए हिंदी भाषा और साहित्य को जानना जरूरी समझती हैं। वह इस दिशा में जी-जान से अग्रसर हैं।
मदीना ने बताया कि वह छह भाषाओं की जानकार हैं, लेकिन तजाकिस्तान की भाषा के बाद सबसे ज्यादा हिंदी पसंद करती हैं। हिंदी ही नहीं, हिंदुस्तान भी उन्हें प्यारा लगता है। उन्हें आगरा शहर भी बहुत पसंद है।
वह पिछले पांच वर्षो से भारत में हैं और लगातार हिंदी का अध्ययन कर रही हैं। उनका कहना है कि तजाकिस्तान लौटकर वह हिंदी साहित्य का अपनी भाषा में अनुवाद करेंगी।

स्रोत - http://www.currentcrime.com/tajikistans-medina-brought-indias-hindi-love-tajikistan-medina-hindi-news/

Saturday, August 8, 2015

केंद्रीय हिंदी संस्थान के नए निदेशक - अगस्त 2015

एनके पांडे की मिली अहम जिम्मेदारी
राजस्थान विश्वविधालय के हिन्दी विभाग के एचआेडी प्रो एनके पांडेय को  यूपी के आगरा स्थित केन्द्रीय हिन्दी संस्थान के निदेशक पद पर नियुक्ति दी गई है। माना जा रहा है  पांडे को भी संघ निष्ठ होने का लाभ मिला है।  एचआरडी मंत्रालय द्वारा स्थापित ये संस्थान अहिन्दी भाषी क्षेत्रों में हिन्दी प्रशिक्षण और विदेशियों को हिन्दी पढ़ाने का जिम्मा संभालने वाला  संस्थान है। जिसके देश में नौ केन्द्र है।
निदेशक का पदभार संभालने वाले प्रो पाण्डेय ने कहा कि अब हिन्दी शिक्षकों को प्रशिक्षण देने, केन्द्रों की स्थिति मजबूत करने और दक्षिण भारत के साथ पूर्वोत्तर क्षेत्र में हिन्दी के प्रचार.प्रसार में गति लाने का प्रयास किया जाएगा ।
स्रोत - राजस्थान पत्रिका (01/08/2015)
http://bit.ly/1KWqRUx

Sunday, June 28, 2015

निदेशक की नियुक्ति प्रक्रिया अधर में लटकी

केंद्रीय हिन्दी संस्थान आगरा के निदेशक की नियुक्ति प्रक्रिया अधर में लटक गई है। खबर है नियुक्ति प्रक्रिया में एक उम्मीदवार का नाम बाद में जोड़े जाने पर कार्मिक मंत्रालय ने आपत्ति दर्ज कराई है जिसके बाद नियुक्ति की फाइल अटकी हुई है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय यह बता पाने में असमर्थ है कि कब संस्थान को नया निदेशक मिलेगा।

आगरा हिन्दी संस्थान के निदेशक का कार्यकाल पिछले साल अगस्त में ही खत्म हो गया था। लेकिन नई नियुक्ति नहीं होने के कारण निदेशक मोहन को सेवा विस्तार दे दिया गया। केंद्र सरकार ने नए निदेशक की नियुक्ति प्रक्रिया देर से शुरू की और प्रक्रिया में अब और देरी होने लगी है। 7 अप्रैल को उम्मीदवारों के इंटरव्यू हुए थे। इसके बाद मंत्रालय ने तीन लोगों के नाम का पैनल तैयार किया था। लेकिन खबर यह है कि इसमें एक ऐसे व्यक्ति का नाम शामिल किया गया जिससे विधिवत आवेदन ही नहीं किया था। इस बार में कार्मिक मंत्रालय को शिकायतें मिलने की खबर है।

सूत्रों के अनुसार इस बारे में कार्मिक मंत्रालय को शिकायत मिलने के बाद नियुक्ति प्रक्रिया की दोबारा जांच की गई है। खबर है कि कार्मिक मंत्रालय ने उस व्यक्ति के नाम को हटाने और दोबारा पैनल तैयार करके भेजने को कहा है। मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार दोबारा पैनल बनाकर भेजा जा रहा है। इसलिए इस अभी निदेशक की नियुक्ति में समय लग सकता है।

बता दें कि केंद्रीय यूनिर्वसिटीमें कुलपतियों के एक दर्जन से भी अधिक पद रक्ति पड़े हैं। सीबीएसई और एनसीईआरटीई जैसे महकमों के मुखिया की भी नियुक्ति नहीं हो पा रही है। हिन्दी संस्थान भी इसी कतार में खड़ा है।

स्रोत -  हिन्दुस्तान (28/06/2015)
http://bit.ly/1IPwNea

Thursday, March 5, 2015

केंद्रीय हिंदी संस्थान के लेखाधिकारी पर सीवीसी की जाँच

केंद्रीय हिंदी संस्थान में वित्तीय अनियमितताआें की जांच केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) करेगा। आरटीआई एक्टिविस्ट सुनीत चौहान ने प्रधानमंत्री कार्यालय और सीवीसी से शिकायत कर लेखाधिकारी और डिप्टी रजिस्ट्रार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीएमओ के निर्देश पर ही सीवीसी ने मामला पंजीकृत कर जांच शुरू कर दी है।


शिकायत में कहा गया कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर के स्वायत्तशासी संस्थान में उच्च अधिकारी नियमों को ताक पर रख सरकारी धन का दुरुपयोग कर रहे हैं। लेखाधिकारी को अपने गृह नगर में प्लॉट खरीदने को 20 अगस्त 2013 में भवन निर्माण मद से साढे़ सात लाख रुपये दिए गए। लेखाधिकारी पर पद पर रहते हुए उच्च श्रेणी का आवास आवंटन, लाइसेंस फीस सामान्य रूप से लेना, तीन बच्चों की ट्यूशन फीस लेना, संस्थान में नियम विरुद्घ तरीके से बच्चाें का शिक्षण शुल्क लेने जैसे आरोप हैं।
परिवार के साथ सरकारी खर्चे पर हवाई यात्राएं
डिप्टी रजिस्ट्रार अनिल चौधरी पर इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस, पटना में कनिष्ठ लेखाधिकारी रहते हुए सेवा शर्तों की अनदेखी करने और चार लाख रुपये जमा न करने और बिना अनुमति के परिवार के साथ सरकारी खर्चे पर हवाई यात्राएं करने का आरोप भी हैं।
रजिस्ट्रार पर लगे आरोपों की जांच चल रही
इससे पहले रजिस्ट्रार चंद्रकांत त्रिपाठी पर भी वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अवर सचिव पीपी नायर ने बीते साल जुलाई में निदेशक को जांच के आदेश दिए थे। रजिस्ट्रार पर लगे आरोपों की जांच सीबीआई की एंटी करप्शन शाखा भी कर रही है।
वर्जन-
सभी आरोप गलत हैं। जांच में सब साबित हो जाएगा। पूरा मामला प्रमोशन का है। एक साथी हैं जो प्रमोशन की दौड़ में हैं, लेकिन कदाचार के आरोपों के कारण उनका प्रमोशन नहीं हो सका है। उन्होंने ही यह आरोप लगवाए हैं। ताकि मैं दौड़ से बाहर हो जाऊं और उन्हें प्रमोशन मिल जाए।
- अनिल चौधरी, डिप्टी रजिस्ट्रार, केंद्रीय हिंदी संस्थान

स्रोत - अमर उजाला (05/03/2015)
http://bit.ly/1IVEzaO

Friday, January 16, 2015

संस्थान में भ्रष्टाचार का दीमक

आगरा 
गैर हिंदी भाषी लोगों के लिए आगरा में बना केंद्रीय हिंदी संस्थान। आगरा में बना यह देश का सबसे बड़ा केंद्र है। इस संस्थान में भ्रष्टाचार का दीमक लग चुका है। संस्थान में अभी तक उड़ीसा के 132 छात्रों की मार्कशीट फर्जी पाई गई हैं।
आरटीआई के माध्यम से जब संस्थान से जवाब मांगा गया तो पता चला की पिछले 9 साल के फर्जी अंकपत्रों की जांच का कोई ब्योरा संस्थान के पास नही है। आगरा का केंद्रीय हिंदी संस्थान देश की हिंदी भाषा का मुख्य केंद्र है जहां इस समय देश के पूर्वोत्तर और विदेशी दोनों मिलाकर लगभग 3 सौ छात्र हिंदी भाषा का कोर्स कर रहे है।
केंद्रीय हिंदी संस्थान की डिग्री का उड़ीसा और पूर्वोत्तर राज्यों में खास महत्व है क्योंकि वहां संस्थान की डिग्री मिलते ही सरकारी नौकरी मिल जाती है। इसी के चलते केंद्रीय हिंदी संस्थान फर्जीवाड़े का एक बड़ा केंद्र बना हुआ है। उड़ीसा से जांच के लिए आई 132 डिग्रीयां फर्जी पाई गई हैं।
सुनीत चौहान नाम के आरटीआई एक्टिविस्ट ने संस्थान से जब सूचना मांगी तो खुलासा हुआ कि केंद्रीय हिंदी संस्थान के पास फर्जी डिग्री की जांचों का केवल एक साल का रिकॉर्ड है 9 सालों से जांचों के सारे रिकॉर्ड गायब हैं।
स्रोत - न्यूज़ 18 (16/01/2015)
http://bit.ly/1McGuIZ

Tuesday, September 9, 2014

केंद्रीय हिन्‍दी संस्‍थान की छात्राओं ने मनचले की कर दी धुनाई


आगरा। छेड़खानी से परेशान केंद्रीय हिन्‍दी संस्‍थान की छात्राओं ने सोमवार की शाम एक मनचले की खूब पिटाई की। उसके बाद उसे पुलिस के हवाले कर दिया। आरोपी ने मिजोरम की एक छात्रा का हाथ पकड़ लिया था।

उसकी हरकत देख, उसके साथ दूसरी छात्रा ने तुरंत ही गर्ल्स हॉस्‍टल फोन कर दिया। थोड़ी ही देर में 50 से अधिक छात्राएं जमा हो गईं। और युवक की धुनाई करने लगी। उसे पीटते हुए छात्राएं करीब आधे किलोमीटर दूर खंदारी पुलिस चौकी तक ले गईं।

आरोपी युवक हरेंद्र अलीगढ़ का रहने वाला है। उसके खिलाफ छेड़खानी का मामला दर्ज कर लिया गया। 
छात्राओं ने बताया कि दो सहेली सोमवार की शाम सेंट्रल बैंक के एटीएम गई थी। यहां से बाहर निकलते समय आरोपी हरेंद्र ने एक छात्रा का हाथ पकड़ लिया और अश्‍लील हरकत करने लगा।

केंद्रीय हिन्‍दी संस्‍थान के चीफ वॅार्डन प्रो. विद्या शंकर शुक्‍ला ने भी इस मामले का जिक्र करते हुए पुलिस से सुरक्षा बढ़ाए जाने को कहा है। केंद्रीय हिन्‍दी संस्‍थान में भारत और विदेश की छात्राएं हिन्‍दी सीखती हैं।
स्रोत - ईनाडु इंडिया (09/09/2014)
http://bit.ly/1ItTsQ9

Thursday, June 7, 2012

सबूत बता रहे हैं कि केंद्रीय हिंदी संस्‍थान में कुछ गड़बड़ है!

सबूत बता रहे हैं कि केंद्रीय हिंदी संस्‍थान में कुछ गड़बड़ है!

7 JUNE 2012 ONE COMMENT
केंद्रीय हिंदी संस्‍थान के उपाध्‍यक्ष अशोक चक्रधर जी के वित्त प्रेम को लेकर हमने एक रिपोर्ट (कृपा की मूसलाधार बारिश में कब तक नहाएंगे अ. चक्रधर) परसों प्रकाशित की थी। अशोक जी के एतराज पर हमने 18 घंटे के लिए उसे ऑफलाइन मोड में डाल दिया था। हमारे पास सिर्फ विश्‍वसनीय सूचना थी, सबूत की हार्ड कॉपी नहीं थी। हमने इन 18 घंटों में कई सारे ऐसे दस्‍तावेज इकट्ठे किये जो बताते हैं कि देश भर में कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए अशोक जी केंद्रीय संस्‍थान से भुगतान लेते हैं। मसलन…
 26, 27, 28 फरवरी, 2012 को गेल इंडिया के कार्यक्रम में भाग लेने के लिए मुंबई गये थे और 50,000 रुपये संस्थान से लिये। (देखें दस्‍तावेज एकदस्‍तावेज दो)
 उसी तरह 26 से 29 नवंबर 2011 को वे हिंदुस्‍तान पेट्रोलियम के एक कार्यक्रम में मुंबई गये और इस यात्रा में 28 अप्रैल को उपयोग में लायी गयी एक प्राइवेट टैक्‍सी का 2400 रुपये का भुगतान केंद्रीय हिंदी संस्‍थान से लिया। (देखें दस्‍तावेज एक)
 19 अक्‍टूबर 2010 को जीवंती फाउंडेशन चैरिटी ट्रस्‍ट के कार्यक्रम में भाग लेने के लिए वे मुंबई गये और इस यात्रा के लिए केंद्रीय हिंदी संस्‍थान से तीस हजार रुपये अग्रिम भुगतान की राशि ली। (देखें दस्‍तावेज एक)
 यहां कि विदेश दौरे के लिए भी अशोक जी ने केंद्रीय हिंदी संस्‍थान का ही वित्त सहयोग लिया। पिछले महीने भारतीय विद्या भवन के एक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए वे सिडनी गये और टिकट का भुगतान केंद्रीय हिंदी संस्‍थान से कराया। साथ ही बाकी खर्चों के लिए एक लाख रुपये का चेक भी लिया। (देखें दस्‍तावेज एक)
ऐसी कई यात्राओं के दस्‍तावेज मोहल्‍ला लाइव के पास मौजूद हैं, जो किसी भी किस्‍म की कानूनी कार्रवाई की स्थिति में सामने लाया जाएगा।
मोहल्‍ला लाइव के मॉडरेटर अविनाश को लिखे अपने पत्र में अशोक जी ने आरोपों से आहत होने की स्थिति में कानूनी रास्‍ता अख्तियार करने का इशारा भी किया है। पर दिलचस्‍प ये है कि जिस जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के बारे में वे पूरे विश्‍वास से कहते हैं कि जयपुर यात्रा के लिए संस्‍थान का कोई धन खर्च नहीं किया है, उस यात्रा के लिए वे तीस हजार रुपये की राशि संस्‍थान से एडवांस के तौर पर लेते हैं।

पूरा आवेदन देखने के लिए इमेज पर चटका लगाएं। साथ ही यह दस्‍तावेज भी देखें : जेएलएफ की यात्रा के दौरान ड्राइवर के लिए भुगतान का आदेश पत्र

जिन संस्‍थानों, कंपनियों के कार्यक्रम में अशोक जी भाग लेने के लिए जगह जगह आते-जाते रहे हैं, वे अपने वक्‍ताओं-अतिथियों के आने-जाने-रहने का पूरा खर्च वहन करते हैं। ऐसी स्थिति में "अगर" इन यात्राओं के लिए अशोक जी केंद्रीय हिंदी संस्‍थान सहित मेजबान संस्‍थानों, कंपनियों से भत्ता लेते रहे हैं, तो यह वित्तीय बेईमानी का एक शर्मनाक उदाहरण होगा, जिसकी जांच होनी चाहिए। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल वाले प्रसंग में अशोक जी के उत्तर और संस्‍थान से मिले भुगतान के दस्‍तावेज से जाहिर भी होता है कि वित्तीय बेईमानी की गयी है।
मजे की बात यह है कि भुगतान संबंधी सारे आवेदन उपाध्‍यक्ष के निजी सहायक राजीव वत्‍स के नाम से किये गये हैं और उसकी संस्‍तुति खुद उपाध्‍यक्ष महोदय ने ही की है। यानी जो पैसे मांग रहा है, वही आदेश भी दे रहा है कि पैसे दिये जाएं।
बहरहाल, हम यहां अशोक जी का पत्र प्रकाशित कर रहे हैं और कुछ दस्‍तावेजों की स्‍कैन कॉपी भी पेस्‍ट कर रहे हैं।
प्रिय अविनाश जी,
तथ्यविहीन रिपोर्टिंग तो आपने मुझसे बिना पूछे कर ही दी थी, पर आलेख हटा दिया है, उसके लिए आभारी हूं। आपकी जानकारी के लिए बताऊं कि जयपुर यात्रा के लिए मैंने संस्थान का कोई धन खर्च नहीं किया है। सूचनाएं देने वाले अकर्मण्यों से रसीद मांग लें।
उपाध्यक्ष कार्यालय मेरे घर में नहीं है। एक दूसरा फ्लैट पूरी तरह से संस्थान के काम के लिए समर्पित है, जिसका कोई किराया मैं संस्थान से नहीं ले रहा हूं। पूरे संस्थान में वाई फाई कनेक्शन केवल उपाध्यक्ष कार्यालय में है। मैं चाहता हूं कि पूरा संस्थान हाई टेक हो। क्या आप बिना इंटरनेट के अपनी पत्रिका चला सकते हैं? मेरी सहयोगियों की टीम सर्वाधिक सक्रिय है।
सूची लिंक एकलिंक दो ] में जो सुविधाएं हैं, वे नयी आवश्यकताओं के अनुसार मुझे प्रदत्त की गयी हैं। आईआईसी की सुविधा भी हिंदी के प्रचार और प्रसार के लिए संस्थान ने दी, जिस सुविधा का सार्थक उपयोग पहले के उपाध्यक्षों ने किया है। सुरा सेवन का कोई बिल संस्थान के पास नहीं होगा। संस्थान का दायित्व वैश्विक है, मैं निस्वार्थ भाव से अधिकाधिक समय देता हूं। मुझे लगता है आलस्य ही आरापों को जन्म दे रहा है।
काश हिंदी के हित में सोच सकारात्मक हो सके और काम करने वाले लोगों को काम करने दिया जाए। झूठे आरोपों से हर कोई विचलित होता है और वह भी न्याय की शरण में जा सकता है। सद्भाव से बड़ी कोई चीज नहीं होती। मिलने पर बतियाएंगे।
सस्नेह, अशोक