Sunday, June 28, 2015

निदेशक की नियुक्ति प्रक्रिया अधर में लटकी

केंद्रीय हिन्दी संस्थान आगरा के निदेशक की नियुक्ति प्रक्रिया अधर में लटक गई है। खबर है नियुक्ति प्रक्रिया में एक उम्मीदवार का नाम बाद में जोड़े जाने पर कार्मिक मंत्रालय ने आपत्ति दर्ज कराई है जिसके बाद नियुक्ति की फाइल अटकी हुई है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय यह बता पाने में असमर्थ है कि कब संस्थान को नया निदेशक मिलेगा।

आगरा हिन्दी संस्थान के निदेशक का कार्यकाल पिछले साल अगस्त में ही खत्म हो गया था। लेकिन नई नियुक्ति नहीं होने के कारण निदेशक मोहन को सेवा विस्तार दे दिया गया। केंद्र सरकार ने नए निदेशक की नियुक्ति प्रक्रिया देर से शुरू की और प्रक्रिया में अब और देरी होने लगी है। 7 अप्रैल को उम्मीदवारों के इंटरव्यू हुए थे। इसके बाद मंत्रालय ने तीन लोगों के नाम का पैनल तैयार किया था। लेकिन खबर यह है कि इसमें एक ऐसे व्यक्ति का नाम शामिल किया गया जिससे विधिवत आवेदन ही नहीं किया था। इस बार में कार्मिक मंत्रालय को शिकायतें मिलने की खबर है।

सूत्रों के अनुसार इस बारे में कार्मिक मंत्रालय को शिकायत मिलने के बाद नियुक्ति प्रक्रिया की दोबारा जांच की गई है। खबर है कि कार्मिक मंत्रालय ने उस व्यक्ति के नाम को हटाने और दोबारा पैनल तैयार करके भेजने को कहा है। मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार दोबारा पैनल बनाकर भेजा जा रहा है। इसलिए इस अभी निदेशक की नियुक्ति में समय लग सकता है।

बता दें कि केंद्रीय यूनिर्वसिटीमें कुलपतियों के एक दर्जन से भी अधिक पद रक्ति पड़े हैं। सीबीएसई और एनसीईआरटीई जैसे महकमों के मुखिया की भी नियुक्ति नहीं हो पा रही है। हिन्दी संस्थान भी इसी कतार में खड़ा है।

स्रोत -  हिन्दुस्तान (28/06/2015)
http://bit.ly/1IPwNea

Saturday, May 9, 2015

केंद्रीय हिंदी संस्थान में क्राइम ब्रांच का छापा, रिकार्ड जब्त

फर्जी मार्कशीट प्रकरण में उड़ीसा की क्राइम ब्रांच टीम ने शुक्रवार को केंद्रीय हिंदी संस्थान में छापा मारा। दो सदस्यीय टीम ने यहां करीब दस घंटे तक रिकार्ड खंगाले। उच्चाधिकारियों समेत कइयाें से घंटों पूछताछ की। टीम ने शैक्षणिक रिकार्ड और कंप्यूटर डेटा शीट जब्त की है। टीम के यहां दो दिन तक रहने की उम्मीद है।

अमर उजाला ने बीते साल 24 दिसंबर को केंद्रीय हिंदी संस्थान में चल रहे फर्जी मार्कशीट बनाने के गिरोह का भंड़ाफोड़ किया था। उड़ीसा और आंध्र प्रदेश से संस्थान में सत्यापन को आईं करीब 132 मार्कशीट फर्जी पाई गईं। पूरे खेल में आगरा के उच्चाधिकारियाें का हाथ सामने आया है। इस पर संस्थान प्रशासन ने बीती 22 जनवरी को उड़ीसा और आंध्रप्रदेश में डिग्री फर्जी होने की जानकारी दी। इसके आधार पर दो फरवरी को उच्चस्तरीय जांच बिठाई गई। इसी के तहत शुक्रवार की सुबह साढ़े नौ बजे क्राइम ब्रांच के डीएसपी रमेश चंद्र सेठी और सब इंस्पेक्टर गौरीशंकर संस्थान पहुंचे। उन्होंने कुलसचिव चंद्रकांत त्रिपाठी से मुलाकात कर जांच शुरू की। सूत्र बताते हैं कि इसमें कई गड़बड़ियां टीम को मिली हैं। शाम करीब सात बजे तक जांच चलती रही। 

- फर्जी मार्कशीट की जांच को टीम आई है। मैं फिलहाल दिल्ली मीटिंग में भाग लेने आया हूं, वहां क्या हुआ है मुझे जानकारी नहीं है। प्रो. मोहन, निदेशक केंद्रीय हिंदी संस्थान

- फर्जी मार्कशीट की जांच के लिए टीम आई है। टीम के सदस्य दस्तावेजों की फोटोकापी कराके साथ ले गए हैं। टीम दो दिन और जांच करेगी। चंद्रकांत त्रिपाठी, कुलसचिव, केंद्रीय हिंदी संस्थान 

जांच में नहीं किया सहयोग
- फर्जीवाड़े की जांच को प्रभावित करने की पूरी कोशिश की जा रही है। सूत्र बताते हैं कि टीम को जांच में सहयोग नहीं किया गया। टीम द्वारा मांगे गए कई दस्तावेज भी आधे-अधूरे उपलब्ध कराए गए। 

मीडिया को कवरेज से रोका
- मीडियाकर्मियों को कवरेज से रोका गया। इसका विरोध करने पर जांच टीम स्वयं आगे आए। डीएसपी रमेश चंद्र सेठी ने बताया कि फर्जी मार्कशीट मामले में जांच करने आए हैं। जरूरत के मुताबिक शैक्षणिक रिकार्ड मांगे जा रहे हैं। 

यह है पूरा मामला
- 2003 से 2012 तक की 132 फर्जी मार्कशीट पकड़ में आईं। संस्थान के दिल्ली, गुवाहाटी, हैदराबाद, शिलांग और मैसूर केंद्र हैं। यहां से मिली डिग्री के आधार पर नौकरी मिलने के बाद संबंधित विभागों ने आगरा मुख्यालय में सत्यापन के लिए डिग्री भेजी थी। इस पर तत्कालीन मानव संसाधन एवं विकास मंत्री कपिल सिब्बल समेत यहां के परीक्षा नियंत्रक के जाली हस्ताक्षर और संस्थान की मुहर पाई गई। मार्कशीट हूबहू वास्तविक मार्कशीट की तरह है। संदेह है कि ऑरिजनल मार्कशीट पर नकली अंक चढ़ाकर इसे लाखाें रुपये में बेचा गया है।

स्रोत - अमर उजाला (09/05/2015)
http://bit.ly/1MZ788X

Tuesday, March 10, 2015

आगरा में उड़ीसा की छात्रा से अश्लील हरकत, चपरासी गिरफ्तार

केन्द्रीय हिंदी संस्थान में उड़ीसा की एक छात्रा से अश्लील हरकत कर उसे परेशान करने का मामला प्रकाश में आया है। आगरा। केन्द्रीय हिंदी संस्थान में उड़ीसा की एक छात्रा से अश्लील हरकत कर उसे परेशान करने का मामला प्रकाश में आया है। आरोपी सौरभ राज संस्थान में ही कॉन्ट्रेक्ट पर चपरासी है। कुलसचिव डा. चंद्रकांत त्रिपाठी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपी को नौकरी से बर्खास्त कर पुलिस के हवाले कर दिया है। केन्द्रीय हिंदी संस्थान में उड़ीसा की छात्रा सीमा (काल्पिनिक नाम) प्रवीण की पढ़ाई कर रही है। वह कैंपस में ही बने हॉस्टल में रहती है। वहीं कार्यरत चपरासी सौरभ राज पिछले आठ माह से सीमा से मोबाइल फोन पर अश्लील बातें कर उसे परेशान कर रहा था। शिकायत करने पर फेल कराने की धमकी देता था। मना करने पर भी वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा था। अंतत: सीमा ने यह बात अपनी सहेलियों को बताई। हिम्मत कर सभी छात्राओं ने उसे सबक सिखाने की ठान ली। इसके बाद उसकी अश्लील बातों की आठ मिनट की रिकार्डिंग कर ली गई। सोमवार शाम को सभी छात्राओं ने इस सबूत को लेकर कुलसचिव के पास शिकायत की। छात्राएं इतने गुस्से में थीं कि सभी एकजुट होकर तहरीर देने के लिए न्यू आगरा थाने में पहुंच गईं। पुलिस ने मंगलवार सुबह आरोपी चपरासी को गिरप्तार कर लिया। उसके खिलाफ अपराध क्रमांक 228/15 धारा 294 के तहत मामला दर्ज किया गया है। उधर, हिंदी संस्थान के कुलसचिव डा. चंद्रकांत त्रिपाठी ने कहा कि यह शर्मसार करनेवाली घटना है। इस मामले में दोषी चपरासी सौरभ राज को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है। साथ ही उसके कैंपस में प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। उन्होंने छात्राओं से ऐसे मामलों में निर्भीक होकर तत्काल शिकायत करने की अपील की है। उल्लेखनीय है कि केन्द्रीय हिंदी संस्थान अंतरराष्ट्रीय स्तर का शिक्षण संस्थान है, जो हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए कार्यरत है। इसमें गैर हिंदी प्रदेशों के अलावा विदेशों से भी छात्र-छात्राएं पढ़ाई करने के लिए आते हैं। इस तरह की घटनाओं से संस्थान की छवि को गहरा धक्का लग सकता है।

स्रोत - पत्रिका (10/03/2015)
http://bit.ly/1PdCyYp

केंद्रीय हिंदी संस्थान से मंत्रालय नाराज़


जागरण संवाददाता,आगरा: लगातार लापरवाही से नाराज मंत्रालय ने इस बार केंद्रीय हिंदी संस्थान को तगड़ा झटका दे दिया। मरम्मत के लिए भेजे गए 5.30 करोड़ के प्रस्ताव में कटौती करते हुए सिर्फ तीस लाख मंजूर किए हैं। संस्थान द्वारा चार साल से पैसा दिए जाने के बावजूद मरम्मत कार्य न कराए जाने के कारण यह कदम उठाया है।
संस्थान द्वारा कई साल से करोड़ों रुपये का बजट मंत्रालय से प्रोजेक्ट के नाम पर मांगा जाता रहा है, लेकिन साल के अंत में प्रोजेक्ट पूरे न होने पर पैसा लौटा दिया जाता है। मरम्मत कार्य के साथ भी यही स्थिति है। संस्थान चार साल से दो पुरुष छात्रावास, एक महिला छात्रावास, मुख्य भवन की मरम्मत के नाम पर तीन से चार करोड़ रुपये मांग रहा है, लेकिन वित्तीय वर्ष के अंत में हर बार यह पैसा लौटा दिया जाता है। इस बार भी रिनोवेशन के लिए 5.30 करोड़ रुपये संस्थान के लिए मंजूर हो गए थे। संस्थान विद्यार्थियों की परीक्षा के बाद निर्माण कार्य शुरू करने जा रहा था लेकिन कुछ दिन पहले मंत्रालय ने पांच करोड़ रुपये काटकर महज तीस लाख रुपये बजट पास किया है। मंत्रालय का तर्क है कि संस्थान बार-बार पैसा लेने के बावजूद प्रोजेक्ट पूरे नहीं कर रहा। मरम्मत कार्य भी नहीं करा रहा। ऐसे में बजट देने का क्या फायदा।
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यह बात सही है कि पिछले चार साल से मरम्मत कार्य के नाम पर लिया जा रहा पैसा संस्थान द्वारा लौटाया जा रहा है। इस बार मरम्मत कार्य के लिए वित्त समिति और शासी समिति की बैठक में पांच करोड़, तीस लाख रुपये के बजट को मंजूरी दे दी गई थी, लेकिन मंत्रालय ने केवल तीस लाख रुपये प्रदान किए हैं।
अनिल चौधरी, लेखाधिकारी, केंद्रीय हिंदी संस्थान
स्रोत
http://www.jagran.com/uttar-pradesh/agra-city-12148867.html

Thursday, March 5, 2015

केंद्रीय हिंदी संस्थान के लेखाधिकारी पर सीवीसी की जाँच

केंद्रीय हिंदी संस्थान में वित्तीय अनियमितताआें की जांच केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) करेगा। आरटीआई एक्टिविस्ट सुनीत चौहान ने प्रधानमंत्री कार्यालय और सीवीसी से शिकायत कर लेखाधिकारी और डिप्टी रजिस्ट्रार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीएमओ के निर्देश पर ही सीवीसी ने मामला पंजीकृत कर जांच शुरू कर दी है।


शिकायत में कहा गया कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर के स्वायत्तशासी संस्थान में उच्च अधिकारी नियमों को ताक पर रख सरकारी धन का दुरुपयोग कर रहे हैं। लेखाधिकारी को अपने गृह नगर में प्लॉट खरीदने को 20 अगस्त 2013 में भवन निर्माण मद से साढे़ सात लाख रुपये दिए गए। लेखाधिकारी पर पद पर रहते हुए उच्च श्रेणी का आवास आवंटन, लाइसेंस फीस सामान्य रूप से लेना, तीन बच्चों की ट्यूशन फीस लेना, संस्थान में नियम विरुद्घ तरीके से बच्चाें का शिक्षण शुल्क लेने जैसे आरोप हैं।
परिवार के साथ सरकारी खर्चे पर हवाई यात्राएं
डिप्टी रजिस्ट्रार अनिल चौधरी पर इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस, पटना में कनिष्ठ लेखाधिकारी रहते हुए सेवा शर्तों की अनदेखी करने और चार लाख रुपये जमा न करने और बिना अनुमति के परिवार के साथ सरकारी खर्चे पर हवाई यात्राएं करने का आरोप भी हैं।
रजिस्ट्रार पर लगे आरोपों की जांच चल रही
इससे पहले रजिस्ट्रार चंद्रकांत त्रिपाठी पर भी वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अवर सचिव पीपी नायर ने बीते साल जुलाई में निदेशक को जांच के आदेश दिए थे। रजिस्ट्रार पर लगे आरोपों की जांच सीबीआई की एंटी करप्शन शाखा भी कर रही है।
वर्जन-
सभी आरोप गलत हैं। जांच में सब साबित हो जाएगा। पूरा मामला प्रमोशन का है। एक साथी हैं जो प्रमोशन की दौड़ में हैं, लेकिन कदाचार के आरोपों के कारण उनका प्रमोशन नहीं हो सका है। उन्होंने ही यह आरोप लगवाए हैं। ताकि मैं दौड़ से बाहर हो जाऊं और उन्हें प्रमोशन मिल जाए।
- अनिल चौधरी, डिप्टी रजिस्ट्रार, केंद्रीय हिंदी संस्थान

स्रोत - अमर उजाला (05/03/2015)
http://bit.ly/1IVEzaO

Friday, January 16, 2015

संस्थान में भ्रष्टाचार का दीमक

आगरा 
गैर हिंदी भाषी लोगों के लिए आगरा में बना केंद्रीय हिंदी संस्थान। आगरा में बना यह देश का सबसे बड़ा केंद्र है। इस संस्थान में भ्रष्टाचार का दीमक लग चुका है। संस्थान में अभी तक उड़ीसा के 132 छात्रों की मार्कशीट फर्जी पाई गई हैं।
आरटीआई के माध्यम से जब संस्थान से जवाब मांगा गया तो पता चला की पिछले 9 साल के फर्जी अंकपत्रों की जांच का कोई ब्योरा संस्थान के पास नही है। आगरा का केंद्रीय हिंदी संस्थान देश की हिंदी भाषा का मुख्य केंद्र है जहां इस समय देश के पूर्वोत्तर और विदेशी दोनों मिलाकर लगभग 3 सौ छात्र हिंदी भाषा का कोर्स कर रहे है।
केंद्रीय हिंदी संस्थान की डिग्री का उड़ीसा और पूर्वोत्तर राज्यों में खास महत्व है क्योंकि वहां संस्थान की डिग्री मिलते ही सरकारी नौकरी मिल जाती है। इसी के चलते केंद्रीय हिंदी संस्थान फर्जीवाड़े का एक बड़ा केंद्र बना हुआ है। उड़ीसा से जांच के लिए आई 132 डिग्रीयां फर्जी पाई गई हैं।
सुनीत चौहान नाम के आरटीआई एक्टिविस्ट ने संस्थान से जब सूचना मांगी तो खुलासा हुआ कि केंद्रीय हिंदी संस्थान के पास फर्जी डिग्री की जांचों का केवल एक साल का रिकॉर्ड है 9 सालों से जांचों के सारे रिकॉर्ड गायब हैं।
स्रोत - न्यूज़ 18 (16/01/2015)
http://bit.ly/1McGuIZ

Wednesday, January 7, 2015

केंद्रीय हिंदी संस्थान में भिड़े अधिकारी

आगरा: केंद्रीय हिंदी संस्थान के प्रवेश एवं परीक्षा विभाग के दो अधिकारियों में रार ठन गई है। दोनों एक-दूसरे को फूटी आंख नहीं सुहाते हैं। मंगलवार को दोनों के तेवर इस कदर कड़े थे कि निदेशक कार्यालय में एक-दूसरे को देखते ही गाली-गलौज शुरू कर दी। ये अधिकारी हैं परीक्षा नियंत्रक और परीक्षा अधिकारी।
फर्जी मार्कशीट के मामले में सोमवार को हुई बेनतीजा बैठक के बाद मंगलवार को संस्थान के निदेशक प्रो. मोहन ने परीक्षा विभाग के अधिकारियों को आगामी कार्यवाही के लिए बुलाया था। सूत्रों का कहना है कि परीक्षा अधिकारी ने परीक्षा नियंत्रक के लिएअपशब्दों का प्रयोग शुरू कर दिया। परीक्षा नियंत्रक ने भी बदले में अपशब्द कहे। इस पर परीक्षा अधिकारी के तेवर और गर्म हो गए। उन्होंने परीक्षा नियंत्रक के लिए गाली-गलौज शुरू कर दी। निदेशक व कार्यालय में मौजूद अन्य अधिकारी मूक दर्शक बने रहे। परीक्षा नियंत्रक प्रो. चंद्रकांत त्रिपाठी का कहना है कि परीक्षा अधिकारी रतन बाबू मुझे पर गलत आरोप लगाकर संस्थान की छवि धूमिल कर रहे हैं। वहीं परीक्षा अधिकारी रतन बाबू के अनुसार परीक्षा नियंत्रक के फर्जी कामों की फेहरिस्त लंबी है। संस्थान की छवि खराब होने के पीछे वे स्वयं जिम्मेदार हैं।

स्रोत - दैनिक जागरण (07/01/2015)
http://bit.ly/1ItXIiv

Thursday, January 1, 2015

MoS HRD Katheriya uncovers scholarship scam in Kendriya Hindi Sansthan Agra

The Union Minister of State for Human Resource Development, Ram Shankar Katheriya today uncovered a huge scam of issuing fake marksheets and extorting money from foreign students at the Central Government-run Kendriya Hindi Sansthan in Agra, where thousands of foreign students seek admission to learn Hindi.
Talking to India Today, Katheriya said that some foreign students had complained to him that the institute is deducting Rs. 2000 per month from their scholarship in the name of mess bill, when it was already included in their fees. Upon reaching the institute to investigate, he found that the complaint was genuine and immediately issued orders for the recovery and refund of the amount illegally charged from the students. He also said, it was found that some people were illegally printing fake marksheets in the institute's computer lab and the institute has been forbidden to issue marksheets from its own computer lab from now onwards, while orders have also been issued to file criminal charges against the culprits in this scam.
Katheriya said that there are about 300 students in the institute and 100 teachers, which makes up for a ratio of 3 students per teacher which is ridiculous. Also, he said, the institute had been issued Rs. 4 crores for maintenance, but the condition of the institute was still pitiable necessitating an inquiry into what exactly happened with the funds.

Notably, there are 68 foreign and 200 Indian tourists in the institute who are given Rs. 3500 and Rs. 2500 respectively as scholarship. The institute's mess has been non-functional since several years, yet the students were being charged Rs. 2000 per foreigner as mess bill even though they had privately arranged for the food to be prepared for Rs. 1000 per student. The illegally charged amount comes up to Rs. 1,36,000 per month and this has been going on for quite a while, since the mess stopped functioning. The Indian students had refused to pay the mess bill and threatened to launch an agitation against the institutes administration, so they are exempted from the 'mess bill'. Katheriya said that as per the rules, the institute cannot legally deduct any amount from a student's scholarship which is issued by the Central Government and this amount has to be sent directly into the student's bank account in full. If any bills are raised to the student, he may be asked them to pay afterwards from whatever means he deems fit. It was an unlawful act to deduct money from scholarships and the culprits will be punished severely.
However, the institute director Dr. Chandrakant Tripathi claimed that the matter was still under investigation and it was not prudent to 'jump the gun'. He said that it is possible that some employees of the institute were involved in a plot to defame the institute which is one of the only two such institutes in India that teach Hindi.
Commenting on the sudden action taken by the minister, Samajwadi Party former city president Wajid Nisar said that the minister has been a professor of Dr. B R Ambedkar University, Agra, for several years and throughout this period he has lived barely a kilometer away from the Central Government-run 'Kendriya Hindi Sansthan', but he never cared to look into these complaints. Even the Cabinet minister for HRD minister, Smriti Irani had visited the institute a few weeks back, but no notice was taken on the complaints of the students. It was only when the students resorted to bringing this matter before the media, that the minister has now reacted in a bid to save his face

Source - India Today (01/01/2015)
http://bit.ly/1KWsfqc

Wednesday, December 31, 2014

केंद्रीय हिंदी संस्थान में मंत्री ने पकड़ा छात्रवृत्ति घोटाला

केंद्रीय हिंदी संस्थान में फर्जी मार्कशीट के बाद अब विदेशी छात्रों की छात्रवृत्ति में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। मंगलवार को संस्थान पहुंचे केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री डा. रामशंकर कठेरिया ने पड़ताल की तो इसका खुलासा हुआ। उन्होंने अधिकारियों को मामले की जांच करने और दोषियों से छात्रवृत्ति की रिकवरी कर मामला दर्ज कराने का निर्देश दिया है।


बता दें, अमर उजाला ने 24 दिसंबर के अंक में ‘केंद्रीय हिंदी संस्थान में 132 फर्जी मार्कशीट’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। मामले की जानकारी के लिए मंगलवार को केंद्रीय राज्यमंत्री डा. कठेरिया संस्थान पहुंचे। उन्होंने प्रशासनिक विभाग, लेखा विभाग, लाइब्रेरी, परीक्षा विभाग आदि का निरीक्षण किया। उन्होंने कंप्यूटर प्रयोगशाला में मार्कशीट की प्रिटिंग तत्काल बंद करने और फर्जी मार्कशीट मामले में एफआईआर कराने के निर्देश दिए। 
पड़ताल के दौरान मंत्री के हाथ छात्रवृत्ति का रजिस्टर लग गया। पता चला कि संस्थान में 68 विदेशी और 200 भारतीय विद्यार्थी हैं। प्रत्येक विदेशी विद्यार्थी को हर महीने 3500 रुपये की छात्रवृत्ति मिलती है, जबकि भारतीय विद्यार्थी को 2500 रुपये। यह छात्रवृत्ति भी ज्यादातर को नकद ही दी जा रही है। जबकि संस्थान परिसर में बैंक भी है। विदेशी विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति से मैस के नाम पर हर माह दो हजार रुपये काटे जाते हैं। एक माह में यह राशि एक लाख 36 हजार होती है। वहीं भारतीय छात्र चंदा कर ठीक इससे आधी धनरिाश में एक हलवाई से खाना बनवाकर खाते हैं। 
विदेशी छात्रों के कई हफ्ते छुट्टी पर जाने के दौरान भी उनकी छात्रवृत्ति से मैस के नाम पर कटौती होती है। हैरत की बात है कि संस्थान किसी मैस का संचालन ही नहीं कर रहा। संस्थान ने तीन रसोइयों को अनुबंध पर नियुक्त किया हुआ है। इन्हें दस हजार रुपये महीने वेतन दिया जा रहा है। खाने के लिए हर महीने मोटी रकम देने के बावजूद विदेशी विद्यार्थी खुद ही राशन जुटाते हैं। कई बार विदेशी छात्राओं को सिकंदरा मंडी में सब्जी खरीदते देखा गया है। यह बात मंत्री के सामने निदेशक प्रो. मोहन ने भी स्वीकार की है। 

कठेरिया ने कहा कि भारतीय विद्यार्थियों से यह कटौती इसलिए नहीं की जाती, क्योंकि वह विरोध कर सकते हैं और संस्थान में व्याप्त भ्रष्टाचार की पोल खोल सकते हैं। उन्होंने विदेशी छात्राओं की सुरक्षा पर भी सवाल खडे़ किए। उन्होंने कहा कि नियमानुसार संस्थान किसी भी छात्र की छात्रवृत्ति से कटौती नहीं कर सकता। अधिकारी जल्द सभी विद्यार्थियों के खाते बैंक में खुलवाएं और छात्रवृत्ति उसी में जमा कराएं। 


300 स्टूडेंट पर 100 का स्टाफ
मंत्री कठेरिया को बताया गया कि 300 स्टूडेंट्स पर संस्थान में शिक्षकों और कर्मचारियों की फौज है। अस्थाई, स्थाई शिक्षकाें, कर्मचारियों की कुल संख्या 100 के करीब है। केंद्रीय मंत्री ने जब शिक्षकों की उपस्थिति जांची तो आधे ही शिक्षक मौजूद मिले। ज्यादातर छुट्टी पर थे। उन्होंने अनुबंधित शिक्षकों को स्थाई तौर पर नियुक्त करने को भी कहा।

मेंटेनेंस को मिले चार करोड़, फिर भी हालत खस्ता
केंद्रीय हिंदी संस्थान भवन के मेंटेनेंस के लिए चार करोड़ रुपये सरकार ने दिए हैं। बावजूद इसके हालत खस्ता है। मंत्री कठेरिया ने संस्थान की अंदरूनी हालत सुधारने के निर्देश दिए।

स्रोत - अमर उजाला (31/12/2014)
http://bit.ly/1hquc4h

Kendriya Hindi Sansthan in Agra to undergo revamp

Agra: A budget of Rs 4 crore has been sanctioned by the Centre for the renovation of buildings of Kendriya Hindi Sansthan in Khandari area of the city. 

MoS (HRD) Ramshankar Katheria, who conducted a surprise inspection of the institute on Tuesday, directed the officials to draw a plan for renovating the classrooms and hostels of the institution. 

Katheria also asked the institute's director to open bank accounts for all foreign students studying in the institute so that scholarship amount of Rs 3,500 could be deposited there. During the inspection, the minister found that many of those students did not have a bank account and they were receiving the money after signing in a register. 

Anil Chaudhary, the minister's representative, said, "Such a system invites malpractice. The Agra MP has set the deadline of January 15 to complete the procedure. There is a branch of a bank in the campus and there are 100 foreign students studying in the campus." 

Katheria also raised objection over the institute's practice of deducting Rs 2,000 from student's scholarship money for mess facility even during vacation months. He said students should not be made to visit markets for buying groceries and other items and the institute should make these arrangements itself. 

The Agra MP also directed the officials to publish mark sheets in utmost secrecy and put an immediate ban on printing in the computer lab. He also asked the institute's director Prof Mohan to lodge an FIR in the fake marksheet case which rocked the Ambedkar University recently. 

Katheria expressed displeasure after finding many staffers on leave during the inspection. He said action will be taken against officials if they do not improve their working style in the coming days. 

The surprise inspection lasted for one hour, during which the minister visited the various departments and classrooms. Despite repeated attempts, institute's director Prof Mohan could not be contacted for his comments.

Wednesday, December 24, 2014

केंद्रीय हिंदी संस्थान में 132 फर्जी मार्कशीट

डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय की तरह ही केंद्रीय हिंदी संस्थान की भी मार्कशीट और डिग्री तैयार करने का रैकेट संचालित है। साल 2003 से 2012 तक के ऐसे 132 मामलों का रिकॉर्ड अमर उजाला के पास है, जिनके भौतिक सत्यापन में संस्थान की मार्कशीट और डिग्री फर्जी पाई गई हैं। नौकरी मिलने के बाद संबंधित विभागों ने डिग्रियों को संस्थान को भौतिक सत्यापन के लिए भेजा था।

फर्जी पाई गईं मार्कशीट हु-बहू असली जैसी हैं। बिना अंकों के भौतिक सत्यापन के इन्हें पकड़ पाना मुमकिन नहीं। प्रत्येक मार्कशीट पर परीक्षा नियंत्रक के नकली हस्ताक्षर हैं और संस्थान की मोहर भी है। इतना ही नहीं पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल के नकली हस्ताक्षर से भी कई डिग्रियां जारी की गई हैं। 
बताया जाता है कि इस तरह के अभी तक सामने आए मामलों की संख्या एक हजार से ऊपर है। संस्थान के एक अधिकारी ने इस मामले की शिकायत मानव संसाधन विकास मंत्रालय से की है। मंत्रालय ने इस संबंध में संस्थान के निदेशक से जांच करने को भी कहा है। 

ऐसा नहीं है कि संस्थान की फर्जी डिग्री और मार्कशीट पकडे़ जाने का खुलासा पहली बार हुआ है। पिछले साल नवंबर में हैदराबाद पुलिस में अदीलाबाद के डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन ऑफिसर ने तीन शिक्षकों पर मामला दर्ज कराकर कहा था कि शिक्षकों ने केंद्रीय हिंदी संस्थान की फर्जी डिग्री और मार्कशीट के आधार पर प्रमोशन पाया है। इस मामले में पुलिस ने संस्थान के निदेशक को चिट्ठी लिखकर ऐसे मामलाें की जानकारी मांगी थी।

मालूम हो कि संस्थान के देशभर में दिल्ली, हैदराबाद, गुवाहाटी, शिलांग, मैसूर समेत छह केंद्र हैं। आगरा मुख्यालय है। यहीं सभी केंद्रों की परीक्षाओं का संचालन किया जाता है। प्रश्न पत्र से लेकर मार्कशीट और डिग्री प्रिंट करने का जिम्मा मुख्यालय पर ही है। केंद्रीय हिंदी संस्थान की अभी तक हिंदी शिक्षण में अलग पहचान है। संस्थान उच्चकोटि के शोध कार्यों को पुस्तक के रूप में प्रकाशित भी करता है। संस्थान में डिजिटल भाषा प्रयोगशाला, कंप्यूटर प्रयोगशाला एवं दृश्य श्रव्य माध्यमों द्वारा विदेशी भाषा के रूप में हिंदी सिखाने के लिए कई पाठ्यक्रमों का विकास किया है। यहां से अर्मेनिया, अफगानिस्तान, बुल्गारिया, बेलारूस, चेक रिपब्लिक, फिजी, गयाना, जार्जिया, हंगरी, इटली, इंडोनेशिया, जापान, लिथुआनिया, मॉरीशस, मंगोलिया, रूस, श्रीलंका, थाईलैंड, तजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, वियतनाम, आस्ट्रिया, रोमानिया, सूरीनाम, चीन आदि देशों से छात्र यहां हिंदी सीखने आते हैं।
स्रोत - अमर उजाला (24/12/2014)
http://bit.ly/1T6z6Ez

Thursday, November 6, 2014

केन्‍द्रीय हिन्‍दी शिक्षण मंडल की बैठक

आज दिनॉंक 06 नवम्‍बर 2014 को आगरा में केन्‍द्रीय हिन्‍दी शिक्षण मंडल की बैठक की अध्‍यक्षता संस्‍थान की अध्‍यक्षा एवं केन्‍द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री श्रीमती स्‍मृति जूबिन इरानी द्वारा की गई। बैठक में निम्‍नलिखित महत्‍वपूर्ण निर्णय लिए गए।  



1. क्षेत्रीय एवं राष्‍ट्रीय भाषाओं में हिंदी भाषा के विस्‍तारकों में विशिष्‍ट विस्‍तारक के लिए सरदार पटेल राष्‍ट्रीय एकता पुरस्‍कार की स्‍थापना की गई। 

2. आर्थिक राजनीतिक, सामाजिक एवं वैचारिक स्‍तर पर चिंतन करने वालों में से उत्‍कृष्‍ट  चिंतक के लिये पंडित दीनदयाल उपाध्‍याय राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार की स्‍थापना की गई।

3. जनजातीय भाषाओं में हिन्‍दी भाषा के विस्‍तारकों को सम्‍मानित करने का निर्णय लिया गया।

4. युवाओं के लिये स्‍वामी विवेकानंद युवा रचनाकार पुरस्‍कार की स्‍थापना की गई।

5. विदेशों में घोषित केन्‍द्रों एवं पीठों की समीक्षा कर उन्‍हें पुन: शुरू किया जायेगा एवं हिन्‍दी के विस्‍तार के लिए अन्‍य स्‍थानों पर नये पीठों एवं केन्‍द्रों की स्‍थापना की जायेगी।

6. युवा वर्ग में हिन्‍दी भाषा के लिये रूची उत्‍पन्‍न करने हेतु सभी केन्‍द्रीय विश्‍वविद्यालयों में चौपाल का आयोजन करने का निर्णय लिया गया।



केन्‍द्रीय हिन्‍दी मंडल की इस बैठक में संस्‍थान के उपाध्‍यक्ष श्री कमल किशोर गोयनका, संयुक्‍त सचिव श्री जे.एस. संधू परिषद के सभी सदस्‍यों ने भाग लिया

Union HRD Minister Smriti Irani visits Kendriya Hindi Sansthan in Agra


Tuesday, September 9, 2014

केंद्रीय हिन्‍दी संस्‍थान की छात्राओं ने मनचले की कर दी धुनाई


आगरा। छेड़खानी से परेशान केंद्रीय हिन्‍दी संस्‍थान की छात्राओं ने सोमवार की शाम एक मनचले की खूब पिटाई की। उसके बाद उसे पुलिस के हवाले कर दिया। आरोपी ने मिजोरम की एक छात्रा का हाथ पकड़ लिया था।

उसकी हरकत देख, उसके साथ दूसरी छात्रा ने तुरंत ही गर्ल्स हॉस्‍टल फोन कर दिया। थोड़ी ही देर में 50 से अधिक छात्राएं जमा हो गईं। और युवक की धुनाई करने लगी। उसे पीटते हुए छात्राएं करीब आधे किलोमीटर दूर खंदारी पुलिस चौकी तक ले गईं।

आरोपी युवक हरेंद्र अलीगढ़ का रहने वाला है। उसके खिलाफ छेड़खानी का मामला दर्ज कर लिया गया। 
छात्राओं ने बताया कि दो सहेली सोमवार की शाम सेंट्रल बैंक के एटीएम गई थी। यहां से बाहर निकलते समय आरोपी हरेंद्र ने एक छात्रा का हाथ पकड़ लिया और अश्‍लील हरकत करने लगा।

केंद्रीय हिन्‍दी संस्‍थान के चीफ वॅार्डन प्रो. विद्या शंकर शुक्‍ला ने भी इस मामले का जिक्र करते हुए पुलिस से सुरक्षा बढ़ाए जाने को कहा है। केंद्रीय हिन्‍दी संस्‍थान में भारत और विदेश की छात्राएं हिन्‍दी सीखती हैं।
स्रोत - ईनाडु इंडिया (09/09/2014)
http://bit.ly/1ItTsQ9

आगरा: मिजोरम की छात्रा से छेड़खानी मामले में महिलाओं ने निकाला जुलूस

आगरा. केंद्रीय हिन्‍दी संस्‍थान की मिजोरम निवासी छात्रा के साथ छेड़खानी के विरोध में महिला शांति सेना ने मंगलवार की शाम जुलूस निकाला। सेना से जुड़ी महिलाएं संस्‍थान के निदेशक से भी मिली। हालांकि, उन्‍हें छात्राओं से मिलने नहीं दिया गया।

बताते चलें कि मंगलवार की शाम महिला शांति सेना पीड़ित छात्राओं से मिलने पहुंची, लेकिन संस्‍थान प्रबंधन ने उन्‍हें मिलने नहीं दिया। बाद में सेना से जुड़ी महिलाओं ने संस्‍थान के निदेशक से बात की। इसके बाद महिलाओं ने छेड़खानी के विरोध में केंद्रीय हिन्‍दी संस्‍थान से खंदारी चौराहे तक विरोध मार्च निकाला। महिला शांति सेना की संयोजिका कुंदनिका शर्मा ने कहा कि किसी भी छात्रा या महिला के साथ छेड़खानी की वारदात असहनीय है। उन्‍होंने कहा कि पीड़ित मणिपुरी छात्रा ने साहस दिखाकर मनचले को सबक सिखाया। उन छात्राओं को सम्‍मानित किया जाना चाहिए।
स्रोत - भास्कर (09/09/2014)
http://bit.ly/1IVYFjO

Thursday, April 3, 2014

हिंदी संस्थान का अंडरवियर चोर

केंद्रीय हिन्‍दी संस्‍थान में विदेशी छात्राएं एक अजीब परिस्थिति से गुजर रही हैं। छात्राओं ने शिकायत दर्ज कराई है कि कोई उनके अंत:वस्‍त्रों को चुरा रहा है। अब तक हॉस्टल से दो बार छात्राओं के कपड़े गायब हो चुके हैं। संस्‍थान के रजिस्‍ट्रार ने पुलिस में मामले की शिकायत की है।
छात्राओं का कहना है कि अंत:वस्‍त्रों की चोरी करने वाला मनोरोगी हो सकता है। अगर वह पकड़ा नहीं गया, तो भविष्‍य में उनके लिए और समस्‍या बढ़ सकती है। पुलिस का कहना है कि कपड़े चोरी करने वाले संस्‍थान से जुड़े या यहां आने-जाने वाले लोग हो सकते हैं।
शुरू में जब अंत:वस्‍त्र गायब हुए तो उन्‍हें सामान्‍य बात लगी, लेकिन एक-एक कर अब तक 12 छात्राओं के अंत:वस्‍त्र चोरी हो चुके हैं। छात्राओं के दबाव के बाद संस्‍थान के रजिस्‍ट्रार ने न्यू आगरा पुलिस थाने में इसकी शिकायत की। कैंपस में दो बार पुलिस जांच कर चुकी है, लेकिन फिर भी चोर पकड़ से बाहर है।
केंद्रीय हिन्‍दी संस्‍थान के रजिस्‍ट्रार को मिजोरम की छात्राओं ने चोर का पता लगाने के लिए ज्ञापन दिया है।

स्रोत - भास्कर (03/04/2014)
http://bit.ly/1IPCzMK

Monday, July 1, 2013

घोटाले पर रिटायरमेंट के साथ चार्जशीट

आगरा, जागरण संवाददाता: वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में घिरे केंद्रीय हिंदी संस्थान के क्लर्क हरीओम शर्मा को गुरुवार को उनकी सेवानिवृत्ति के दिन चार्जशीट जारी की गई है। मंत्रालय के निर्देश पर निदेशक प्रो. के विजय कुमार ने संस्थान आकर यह कार्रवाई की। कार्रवाई के विरोध में कर्मचारियों ने निदेशक का घेराव कर हंगामा किया। सरकारी धन के गबन के आरोप में संस्थान के रजिस्ट्रार चंद्रकांत त्रिपाठी और क्लर्क हरीओम शर्मा लंबे समय से आरोपित हैं। क्लर्क हरीओम पर हॉस्टल में आने वाले बजट में बड़ी हेराफेरी करने का गंभीर आरोप है। दोनों के खिलाफ विजिलेंस की जांच भी चल रही है। पिछले दिनों विजिलेंस की टीम ने यहां आकर दोनों से पूछताछ की थी, जिसके बाद संस्थान के कई और अफसर भी विजिलेंस के निशाने पर आ गए हैं। गुरुवार को हरीओम शर्मा सेवानिवृत्त होने थे। विजिलेंस की रिपोर्ट और मंत्रालय के निर्देश पर संस्थान के निदेशक प्रो. के विजय कुमार सुबह ही संस्थान पहुंचे और आरोपी क्लर्क के खिलाफ चार्जशीट जारी कर दी। जानकारी के बाद कर्मचारी यूनियन में खलबली मच गई। कर्मचारियों ने संस्थान में हंगामा कर निदेशक का घेराव कर लिया। इस पर निदेशक ने किसी भी रियायत से साफ इंकार कर दिया। शाम तक आरोपी कर्मचारी ने आरोप पत्र रिसीव नहीं किया। उप कुलसचिव खेम चंद ने बताया कि चार्जशीट डाक द्वारा घर भिजवाई जाएगी।

स्रोत - दैनिक जागरण (01/07/2011)

Sunday, March 10, 2013

केंहिसं में हवाई टिकट के नाम पर वित्तीय अनयिमितता

जागरण संवाददाता, आगरा: केंद्रीय हिंदी संस्थान में हवाई टिकट के नाम पर वित्तीय अनियमितता सामने आई है। रजिस्ट्रार चंद्रकांत त्रिपाठी के नाम पर शासकीय यात्रा के बिल में मूल टिकट के स्थान पर फर्जी बिल लगाकर धनराशि हासिल कर ली गई।
केन्द्रीय हिंदी संस्थान के रजिस्ट्रार चंद्रकांत त्रिपाठी हैदराबाद केंद्र के मुख्य भवन और छात्रावास संबंधी कार्यो के लिए दिसंबर-जनवरी में हैदराबाद गए थे। उनके आवागमन के टिकट की मूल धनराशि 20 हजार 302 रुपये थी, लेकिन टिकट के नाम पर 27 हजार 889 रुपये पर प्राप्त कर लिए गए। हालांकि बाद में अतिरिक्त धनराशि जमा कर ली गई है। इस संबंध में टिकट बुक करने वाले क्लर्क ने आर्थिक लाभ के लिए ऐसा करने की बात स्वीकारी है। संस्थान ने क्लर्क हिमांशु अग्रवाल का वेतन एक हजार घटाकर दूसरे विभाग में ट्रांसफर कर दिया है। इस संबंध में रजिस्ट्रार चंद्रकांत त्रिपाठी ने बताया कि गड़बड़ी के आरोपी क्लर्क के खिलाफ कार्रवाई की गई है

स्रोत - दैनिक जागरण (10/03/2013)
http://bit.ly/1gT6Vs3

Thursday, June 7, 2012

सबूत बता रहे हैं कि केंद्रीय हिंदी संस्‍थान में कुछ गड़बड़ है!

सबूत बता रहे हैं कि केंद्रीय हिंदी संस्‍थान में कुछ गड़बड़ है!

7 JUNE 2012 ONE COMMENT
केंद्रीय हिंदी संस्‍थान के उपाध्‍यक्ष अशोक चक्रधर जी के वित्त प्रेम को लेकर हमने एक रिपोर्ट (कृपा की मूसलाधार बारिश में कब तक नहाएंगे अ. चक्रधर) परसों प्रकाशित की थी। अशोक जी के एतराज पर हमने 18 घंटे के लिए उसे ऑफलाइन मोड में डाल दिया था। हमारे पास सिर्फ विश्‍वसनीय सूचना थी, सबूत की हार्ड कॉपी नहीं थी। हमने इन 18 घंटों में कई सारे ऐसे दस्‍तावेज इकट्ठे किये जो बताते हैं कि देश भर में कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए अशोक जी केंद्रीय संस्‍थान से भुगतान लेते हैं। मसलन…
 26, 27, 28 फरवरी, 2012 को गेल इंडिया के कार्यक्रम में भाग लेने के लिए मुंबई गये थे और 50,000 रुपये संस्थान से लिये। (देखें दस्‍तावेज एकदस्‍तावेज दो)
 उसी तरह 26 से 29 नवंबर 2011 को वे हिंदुस्‍तान पेट्रोलियम के एक कार्यक्रम में मुंबई गये और इस यात्रा में 28 अप्रैल को उपयोग में लायी गयी एक प्राइवेट टैक्‍सी का 2400 रुपये का भुगतान केंद्रीय हिंदी संस्‍थान से लिया। (देखें दस्‍तावेज एक)
 19 अक्‍टूबर 2010 को जीवंती फाउंडेशन चैरिटी ट्रस्‍ट के कार्यक्रम में भाग लेने के लिए वे मुंबई गये और इस यात्रा के लिए केंद्रीय हिंदी संस्‍थान से तीस हजार रुपये अग्रिम भुगतान की राशि ली। (देखें दस्‍तावेज एक)
 यहां कि विदेश दौरे के लिए भी अशोक जी ने केंद्रीय हिंदी संस्‍थान का ही वित्त सहयोग लिया। पिछले महीने भारतीय विद्या भवन के एक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए वे सिडनी गये और टिकट का भुगतान केंद्रीय हिंदी संस्‍थान से कराया। साथ ही बाकी खर्चों के लिए एक लाख रुपये का चेक भी लिया। (देखें दस्‍तावेज एक)
ऐसी कई यात्राओं के दस्‍तावेज मोहल्‍ला लाइव के पास मौजूद हैं, जो किसी भी किस्‍म की कानूनी कार्रवाई की स्थिति में सामने लाया जाएगा।
मोहल्‍ला लाइव के मॉडरेटर अविनाश को लिखे अपने पत्र में अशोक जी ने आरोपों से आहत होने की स्थिति में कानूनी रास्‍ता अख्तियार करने का इशारा भी किया है। पर दिलचस्‍प ये है कि जिस जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के बारे में वे पूरे विश्‍वास से कहते हैं कि जयपुर यात्रा के लिए संस्‍थान का कोई धन खर्च नहीं किया है, उस यात्रा के लिए वे तीस हजार रुपये की राशि संस्‍थान से एडवांस के तौर पर लेते हैं।

पूरा आवेदन देखने के लिए इमेज पर चटका लगाएं। साथ ही यह दस्‍तावेज भी देखें : जेएलएफ की यात्रा के दौरान ड्राइवर के लिए भुगतान का आदेश पत्र

जिन संस्‍थानों, कंपनियों के कार्यक्रम में अशोक जी भाग लेने के लिए जगह जगह आते-जाते रहे हैं, वे अपने वक्‍ताओं-अतिथियों के आने-जाने-रहने का पूरा खर्च वहन करते हैं। ऐसी स्थिति में "अगर" इन यात्राओं के लिए अशोक जी केंद्रीय हिंदी संस्‍थान सहित मेजबान संस्‍थानों, कंपनियों से भत्ता लेते रहे हैं, तो यह वित्तीय बेईमानी का एक शर्मनाक उदाहरण होगा, जिसकी जांच होनी चाहिए। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल वाले प्रसंग में अशोक जी के उत्तर और संस्‍थान से मिले भुगतान के दस्‍तावेज से जाहिर भी होता है कि वित्तीय बेईमानी की गयी है।
मजे की बात यह है कि भुगतान संबंधी सारे आवेदन उपाध्‍यक्ष के निजी सहायक राजीव वत्‍स के नाम से किये गये हैं और उसकी संस्‍तुति खुद उपाध्‍यक्ष महोदय ने ही की है। यानी जो पैसे मांग रहा है, वही आदेश भी दे रहा है कि पैसे दिये जाएं।
बहरहाल, हम यहां अशोक जी का पत्र प्रकाशित कर रहे हैं और कुछ दस्‍तावेजों की स्‍कैन कॉपी भी पेस्‍ट कर रहे हैं।
प्रिय अविनाश जी,
तथ्यविहीन रिपोर्टिंग तो आपने मुझसे बिना पूछे कर ही दी थी, पर आलेख हटा दिया है, उसके लिए आभारी हूं। आपकी जानकारी के लिए बताऊं कि जयपुर यात्रा के लिए मैंने संस्थान का कोई धन खर्च नहीं किया है। सूचनाएं देने वाले अकर्मण्यों से रसीद मांग लें।
उपाध्यक्ष कार्यालय मेरे घर में नहीं है। एक दूसरा फ्लैट पूरी तरह से संस्थान के काम के लिए समर्पित है, जिसका कोई किराया मैं संस्थान से नहीं ले रहा हूं। पूरे संस्थान में वाई फाई कनेक्शन केवल उपाध्यक्ष कार्यालय में है। मैं चाहता हूं कि पूरा संस्थान हाई टेक हो। क्या आप बिना इंटरनेट के अपनी पत्रिका चला सकते हैं? मेरी सहयोगियों की टीम सर्वाधिक सक्रिय है।
सूची लिंक एकलिंक दो ] में जो सुविधाएं हैं, वे नयी आवश्यकताओं के अनुसार मुझे प्रदत्त की गयी हैं। आईआईसी की सुविधा भी हिंदी के प्रचार और प्रसार के लिए संस्थान ने दी, जिस सुविधा का सार्थक उपयोग पहले के उपाध्यक्षों ने किया है। सुरा सेवन का कोई बिल संस्थान के पास नहीं होगा। संस्थान का दायित्व वैश्विक है, मैं निस्वार्थ भाव से अधिकाधिक समय देता हूं। मुझे लगता है आलस्य ही आरापों को जन्म दे रहा है।
काश हिंदी के हित में सोच सकारात्मक हो सके और काम करने वाले लोगों को काम करने दिया जाए। झूठे आरोपों से हर कोई विचलित होता है और वह भी न्याय की शरण में जा सकता है। सद्भाव से बड़ी कोई चीज नहीं होती। मिलने पर बतियाएंगे।
सस्नेह, अशोक

Tuesday, May 17, 2011

हिंदी संस्थान में विजिलेंस छापा

आगरा, जागरण संवाददाता: अहिंदी भाषीय क्षेत्रों में हिंदी के प्रसार को कार्यरत केंद्रीय हिंदी संस्थान में वर्ष 2001 से लेकर 2005 तक लाखों की सरकारी रकम का बंदरबांट किया गया। फर्जी ढंग से नौकरियां दी गईं। शिकायत पर मंगलवार को मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय के विजिलेंस की टीम ने संस्थान में छापा मारा। जांच के दौरान कुछ रिकार्ड गायब पाए गए हैं।
मंत्रालय के अवर सचिव केपीजे जैराल्ड और विजिलेंस ऑफीसर मनोज शर्मा ने दोपहर 12 बजे संस्थान में कार्रवाई शुरू की। टीम ने कुलसचिव से वार्ता के बाद शिकायत संबंधी सभी लेखा रिकॉर्ड तलब किए। इसके बाद एक-एक कर जांच से जुड़े अधिकारियों और बाबुओं के बयान लिए गए। श्री जैराल्ड ने बताया कि संस्थान में वर्ष 2001 से लेकर 2005 तक जो भी वित्तीय भुगतान हुए, उसमें बड़ी गड़बड़ी की शिकायतें हैं। उक्त अवधि से संबंधित रिकॉर्ड भी गायब कर दिए गए हैं।
रजिस्ट्रार सहित चार पर जांच
अवर सचिव के मुताबिक रजिस्ट्रार प्रो. चंद्रकांत त्रिपाठी, क्लर्क हरीओम शर्मा सहित चार लोगों के खिलाफ जांच शुरू हुई है। इन पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप हैं। अवर सचिव ने बताया कि आरोपियों के भी बयान लिए हैं। हालांकि जांच पूरी होने के बाद ही कुछ कहा जाएगा।
इन बिंदुओं पर भी कार्रवाई
टीम ने शिकायत के जिन बिंदुओं पर कार्रवाई की उसके अंतर्गत इस अवधि के दौरान छात्रावास के लिए हर साल आने वाली लगभग चार लाख की रकम ठिकाने लगाई गई। सामान की खरीद की जगह फर्जी ढंग से बिलों का भुगतान हुआ, वहीं कई लोगों को मुख्यालय से लेकर मंत्रालय तक फर्जी तरीके से नौकरी दिलाए जाने के भी आरोप हैं। टीम ने इन सभी बिंदुओं पर जांच पड़ताल की।
मेरे खिलाफ साजिश
इस संबंध में रजिस्ट्रार चंद्रकांत त्रिपाठी का कहना है कि मेरे खिलाफ संस्थान के ही अन्य लोगों ने साजिश रची है। झूठी शिकायत पर हो रही विजिलेंस जांच के बाद सब स्पष्ट हो जाएगा।
स्रोत - दैनिक जागरण (